CJI BR Gavai : भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था 4 स्तंभों पर टिकी हुई है। जिसमें न्यायपालिका, विधायिका व कार्यपालिका प्रमुख है। इस लोकतंत्र की जमीन को तैयार करने के लिए चुनाव आयोग की भी अहम भूमिका होती है। 75 सालों में भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई उतार-चढ़ाव देखे लेकिन भारत की न्यायपालिका को लेकर के आम जनता का विश्वास कभी भी कम नहीं हुआ है । इसका प्रमुख कारण भारत का संविधान है, और यहां की न्यायपालिका है। हाल ही में जस्टिस बी आर गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए हैं। वे भारत के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस और अनुसूचित जाति समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई:
भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई बी आर गवई का महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय वकील सम्मेलन समारोह में स्वागत सत्कार संपन्न हुआ। उन्होनें वहां उपस्थित सभी लोगो का इस सत्कार के लिये धन्यवाद किया। ऐसे समय में जब न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों को लेकर संसद और उसके बाहर टकराव की खबरें आती हैं, उन्होने इस सम्मेलन में कहा “ना तो न्यायपालिका और न ही कार्यपालिका बड़ी है अपितु सिर्फ भारत का संविधान सर्वोच्च हैं। ”
जस्टिस बी आर गवई की यात्रा:
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने अपने जीवन की कुछ यादों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अमरावती की झोपड़ी में रहकर वहां के सरकारी नगर निगम के स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। भारत के मुख्य न्यायाधीश गवई का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती में 24 नवंबर 1960 में हुआ था । उन्होंने 16 मार्च 1985 में अपनी वकालत की पढ़ाई की शुरुआत की । 1987 से लेकर 1990 तक उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट में स्वतंत्र वकालत का कार्यकाल किया । तत्पश्चात नागपुर बेंच में 1992 से 1993 के बीच में सरकारी वकील रहे । 14 नवंबर 2003 में उनको मुंबई हाई कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया । 12 नवंबर 2005 को स्थाई जज बने। इसके बाद 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उन्होंने अपना कार्यभार संभाला । जस्टिस गवई का कहना है कि वकील बनना उनके पिता का सपना था जो एक अंबेडकर आंदोलन से जुड़े हुए थे। उनके पिता कानून की पढ़ाई करना चाहते थे । किंतु वह स्वयं परीक्षा नहीं दे सके। उनके पिताजी का कहना था कि उनका बेटा उनके सपने को पूर्ण करेगा ।
पिता के सपने को किया साकार
उनका कहना है कि बचपन से ही उन्हें भारत के संविधान के प्रति लगाव और प्रेम है। क्योंकि उनके पिता संविधान को अधिक महत्व देते थे। उन्होंने एक विषय को साझा करते हुए बताया कि कभी चर्चा थी कि कोई अनुसूचित जाति ,जनजाति समुदाय का व्यक्ति भारत का मुख्य न्यायाधीश नहीं बन सकता । इसके बावजूद उनके सहयोगियों और उनके समुदाय के लोगों ने उन्हें प्रेरित किया और उन्हें समर्थन दिया। उनका कहना है कि संविधान के 75 वर्षों की यात्रा मैं इस वर्ष में देश के मुख्य न्यायाधीश बनने का अवसर मिला यह उनके लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण और सौभाग्य की बात है । चीफ जस्टिस बी आर गवई का कहना है कि भारत की संसद संविधान में संशोधन कर सकती किंतु उसके मूलभूत ढांचे को परिवर्तित नहीं कर सकती । संविधान से ऊपर कोई भी संसद नहीं, न कार्यपालिका और ना ही न्यायपालिका है। संविधान ही सर्वोच्च है ।
7 महीने का कार्यकाल
उन्होंने कहा कि “उनके पास जो भी कार्यकाल का छोटा सा समय है। उसमें कानून के शासन को बनाए रखने तथा भारत के संविधान को बनाए रखने की अपनी शपथ पर कायम रहने की पूरी कोशिश करूंगा”। 14 मई को जस्टिस बी आर गवई ने भारत के 52 वें सीजीआई के रूप में शपथ ली। उनका यह कार्यकाल सिर्फ 7 महीने का है। समारोह के अंत में उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यकाल से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कोई अन्य पद स्वीकार नहीं है। वह देश के आम नागरिकों के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे। उनका यह कहना देश के प्रति सेवा के समर्पण को दर्शाता है।