BJP Oldest Worker Bhulai Bhai Death: किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसके कार्यकर्ता उसकी रीड की हड्डी होते हैं, जो उसके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करते हैं, जिनके दम पर पार्टी आगे बढ़ती है और सत्ता की सीढ़ियां चढ़ती है। इस सफर में हर कार्यकर्ता कोई बड़ा पद पा जाए यह जरूरी नहीं होता। लेकिन बिना पद की लालसा के पार्टी की सालों साल तक सेवा करते रहना और मिसाल बन जाना ऐसे ही थे उत्तर प्रदेश के भुलई भाई । कुछ कार्यकर्ता भले ही पार्टी या सरकार में कोई बड़ा पद हासिल ना कर पाते हों , लेकिन वे पार्टी के नींव के पत्थर जरूर कहलाते हैं। बीजेपी में भी कुछ कार्यकर्ता ऐसे हैं जिन्होंने पार्टी के लिए नींव तैयार की थी उन्ही में से एक थे बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्ता भुलई भाई, जिनका हाल ही में उत्तर प्रदेश में निधन हो गया। उनके निधन के बाद भाजपा के साथ उनके लंबे रिश्ते की चर्चा हर तरफ हो रही है।
भुलई भाई थे बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्ता (BJP Oldest Worker Bhulai Bhai Death)
बीजेपी ने अपने सबसे उम्र दराज कार्यकर्ता भुलई भाई को खो दिया है। 111 साल की उम्र में यूपी के कप्तानगंज में भुलई भाई का निधन हो गया। भुलई भाई को भाजपा के बड़े नेता हर मौके पर याद करते थे। 2022 में योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में भी उन्हें विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था।
जब पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद फोन कर लिया था कुशल क्षेम
करोना काल में कोविड का शिकार हो जाने पर भुलई भाई को खुद पीएम मोदी ने फोन करके उनका हाल-चाल लिया था। वह बीजेपी में भुलई भाई के नाम से मशहूर जरूर थे, लेकिन उनका असली नाम श्री नारायण था। 1974 में वे पहली बार कुशीनगर के नौरंगिया सीट से विधायक बने थे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय को मानते थे अपना आदर्श
भुलई भाई जनसंघ के प्रणेता रहे, पंडित दीनदयाल उपाध्याय से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे। वे 1967 में जनसंघ में शामिल हुए थे। वे जनसंघ की नीतियों और विचारधारा से प्रभावित थे। 1967 में वे जनसंघ में शामिल हो गए। जनसंघ में शामिल होने के लिए उन्होंने अपनी शिक्षा अधिकारी की नौकरी भी छोड़ दी थी। पहली बार जनसंघ के ही टिकट पर वे 1974 में चुनाव लड़े थे और दो बार कुशीनगर की नौरंगिया सीट से विधायक चुने गए थे। अखिल भारतीय जन संघ की स्थापना पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और प्रोफेसर बलराज मधोक ने 1951 में की थी।
जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक था। 1980 में अखिल भारतीय जनसंघ के एक गुट ने अटल बिहारी वाजपेई और श्री लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया था। बीजेपी के गठन के बाद भुलई भाई बीजेपी से जुड़ गए। इमरजेंसी के दौरान वे कई महीनो तक जेल में भी रहे थे। भुलई भाई अपनी आखिरी सांस तक पार्टी के सच्चे कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे । उनके निधन के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।