Bhakra Nangal Dam : 22अक्टूबर 1963 को 61 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी पर बने भाखड़ा-नांगल बांध को राष्ट्र को समर्पित को समर्पित किया था । ये परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तीन राज्यों की भागीदारी की संयुक्त परियोजना थी । सतलुज नदी पर बने इस बांध की ऊंचाई 740 फीट और लम्बाई 1700 फीट है। जो टिहरी बांध के पश्चात भारत का सबसे ऊंचा बांध है। स्वतंत्र प्राप्ति के पश्चात इस बांध की योजना का कार्य 1948 में शुरू होगया था जो 1963 में पूरा हुआ ।
भाखड़ा और नांगल स्थान पर सतलज नदी के पानी को रोक कर यह बांध बनाये गये। जिसको बाद में भाखड़ा-नांगल बांध का नाम दिया गया । इसका मुख्य उद्देश्य तीन राज्यों को सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध कराना एवं विद्युत उत्पादन था । सन 1970 मेंं यह भाखड़ा-नांगल परियोजना पूरी तरह से कार्य करने लगी थी ।
Bhakra Nangal Dam: स्वतंत्र भारत की पहली बड़ी परियोजना
इस बांध से 1335 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। यह स्वतंत्र भारत की उस समय की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना योजना थी । इस बांध का निर्माण अमेरिका की बांध निर्माता कम्पनी हार्वे स्लोकैम के निर्देशन में हुआ था । जो1963 में पूरा होने के पश्चात 22 अक्टूबर 1963 को राष्ट्र के प्रथम प्रधान मंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू ने इसका उद्घाटन करते हुये राष्ट्र को समर्पित किया था । उस समय इस बांध के निर्माण के पश्चात पंजाब में हरितक्रांति आई । यह बांध भूकंपीय क्षेत्र में स्थित विश्व का सबसे ऊंचा गुरुत्वीय बांध है । इस बांध को दो पहाड़ियों के मध्य भाखड़ा गांव के पास बनाया जाने से इसका नाम भाखड़ा बांध पड़ा ।
Bhakra Nangal Dam नांगल बांध :-
नांगल बांध पंजाब के नांगल गांव के समीप भाखड़ा बांध से 13 कि.मी.नीचे है । यह दोनों ही बांध सतलज नदी पर बने हैं । इन दोनों बांधों को मिलाकर ही इनको भाखड़ा -नांगल बांध कहा जाता है। इस बांध के पीछे बनी झील का नाम सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के नाम पर “गोविन्द सागर” रखा गया है। इसकी सहायक इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत इंदिरा नहर बनाई गई जो भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है । इस तरह से इन तीन राज्यों का विकास भाखड़ा नांगल बांध बनने से हुआ । नेहरूजी ने इसको ( Bhakra Nangal Dam) राष्ट्र को समर्पित करते हुये इसे “आधुनिक भारत का मंदिर “कहा था ।
उषा सक्सेना