Badrinath Dham : वर्षो से चली आ रही परम्परा के तहत विश्व प्रसिद्ध तीर्थ बद्रीनाथ धाम के कपाट बंदी की घोषणा मंदिर परिसर में विजयदशमी पर्व के अवसर पर धर्माधिकारी द्वारा मुख्य पुजारी (रावल) की अध्यक्षता में वैदिक पंचांग गणना के आधार पर की जाती है। जबकि ग्रीष्मकालीन कपाट खुलने की घोषणा टिहरी नरेश के नरेंद्र नगर राज दरबार में बसंत पंचमी के दिन राज पुरोहित के द्वारा किये जाने का चलन है। परम्परा के अंतर्गत मंदिर सेवा में पूर्व से योगदान देने वाले थोक (समूहों) के व्यक्तियों को मंदिर संचालन मे सहयोग के लिए अग्रिम वर्ष के लिए पगड़ी पहनायी गई।
17 नवंबर को बंद होंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट
मंदिर का संचालन बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम 1939 के तहत राज्य सरकार द्वारा गठित समिति द्वारा किया जाता है। धाम में बद्रीनाथ मंदिर के अधीनस्थ मंदिर के अन्य मंदिरों की पंच पूजाएं 13 नवंबर से शुरु हो जाएंगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे।
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बद्रीनाथ केदार नाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया इस यात्रा काल के दौरान अभी तक बद्रीनाथ में साढ़े ग्यारह लाख व केदार नाथ में 13 लाख यात्रियों ने दर्शन किये हैं जबकि विगत वर्ष बद्रीनाथ में 16 लाख यात्री पहुंचे थे।
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इस अवसर पर बद्रीनाथ केदार नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, मुख्य पुजारी(रावल) अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल,वेद पाठी रविंद्र भट्ट, मंदिर प्रभारी विपिन तिवारी, मीडिया प्रभारी हरिश गौड़, नगरपंचायत अधिकारी सुनील पुरोहित,थानाध्यक्ष नवनीत भंडारी,राजेंद्र सेमवाल, अवर अभियंता गिरीश रावत व मदिर से जुड़े हक हुकूक धारी,पुरोहित,साधु संत, व्यापारी व स्थानीय लोग बड़ी संख्या मे मौजूद थे।
रमेश कोठारी