Ram Mandir Corridor : अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा । अयोध्या का राम मंदिर हर हिन्दू की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। लेकिन जितना प्यार और उत्साह राम मंदिर को लेकर भारत के लोगों में है उतना ही उत्त्साह नेपाल में भी देखने को मिल रहा है। हो भी क्यों न, नेपाल दुनिया का एक मात्र हिन्दू राष्ट्र है । और भारत से नेपाल का सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव भी है । इसलिए तो अयोध्या में राम मंदिर के उदघाटन से पहले, नेपाल इस बात से उत्साहित है कि अयोध्या में राम मंदिर का विकास उनके लिए भी पर्यटन की संभावनाएं ला सकता है। आखिर राम जन्म भूमि को लेकर नेपाल इतना उत्साहित क्यों हैं नेपाल का आखिर क्या रिश्ता है चलिए आपको बताते हैं।
राम जन्म भूमि से नेपाल का क्या है नाता
नेपाल के जनकपुर को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है, यानि भगवान् राम की जन्मभूमि अयोध्या तो उनकी पत्नी माता सीता की नगरी नेपाल का जनकपुर है । माता सीता को जनकपुत्री या जानकी भी कहा जाता है। अयोध्या का राम मंदिर एशिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा और जिस तरह से यहाँ अंतराष्ट्रीय हवाई सेवा, रेल्वे स्टेशन और दूसरी आधुनिक सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है उससे विदेश में भी इसकी धूम मचना तय है । दुनियाभर से तीर्थयात्री दर्शन के लिए आएंगे जिससे टूरिज्म बढ़ेगा। राम मंदिर की इस प्रसिद्धि से नेपालवासी भी उम्मीद कर रहे हैं कि दुनिया भर से जो तीर्थयात्री राम जन्मस्थान पर आएंगे, वे सीता के जन्मस्थान की भी यात्रा करेंगे।
नेपाल ने की “सिस्टर सिटी रिलेशनशिप” की बात
हाल ही में भारत में नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा कि दोनों देश जनकपुर और अयोध्या के बीच “सिस्टर सिटी रिलेशनशिप” स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। शर्मा मंदिर के उद्घाटन से पहले जनकपुर को रामायण सर्किट का “अनिवार्य” हिस्सा बता रहे हैं। 2014 में सरकार ने रामायण सर्किट में भगवान राम के जीवन को दर्शाया है और इसमें नेपाल के जनकपुर के साथ-साथ रामायण से संबंधित प्रमुख तीर्थ स्थल भी शामिल हैं। शर्मा ने कहा कि दोनों देश सदियों से एक-दूसरे के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य रहे हैं। “राम मंदिर उद्घाटन के बाद, अयोध्या जाने वाले भक्तों की संख्या बढ़ गई है ऐसे में नेपाल में भी तीर्थयात्रीयों का आना दोगुने से भी ज्यादा होगा। शर्मा ने बताया, ”भारत से नेपाल तक सड़क और रेल संपर्क हैं और नेपाल में भी, वे आगे विकसित हो रहे हैं।
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सीता का जन्म स्थान – नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
उन्होंने कहा कि यह भारत और नेपाल के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा । रामायण सर्किट में जनकपुर एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दोनों देशों में पर्यटन विकास में सहायता करेगा। थाईलैंड और इंडोनेशिया में भी ऐसे लोग हैं, जो राम-सीता और अयोध्या जैसी जगहों के बारे में जानते हैं । बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी,” शर्मा ने ये भी बताया कि ”नेपाल में भी भारत की तरह एक बाल्मीकि आश्रम है,” उन्होंने कहा कि नेपालियों का मानना है कि यह मूल धार्मिक स्थान है, जहां माता सीता ने काफी समय बिताया था। नेपाल, अपने यहाँ रामायण सर्किट का समर्थन, विकास और प्रचार करना चाहेगा। वे यहां इनक्रेडिबल चैंबर ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे, और जनकपुर और अयोध्या के बीच सिस्टर सिटी संबंध स्थापित करने के लिए भी काम कर रहे हैं।
रामायण सर्किट : भारत और नेपाल के बीच एक कनेक्शन
2018 में जनकपुर की यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने क्षेत्र को विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की थी। परियोजना अभी तक लागू नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया में है। साथ ही नेपाली पीएम प्रचंड उर्फ पुष्प कमल दहल के दौरे के दौरान भी इस साल की शुरुआत में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि रामायण सर्किट “भारत और नेपाल के बीच एक कनेक्शन” है। पीएम मोदी ने इससे पहले जनकपुर से अयोध्या को जोड़ने वाली बस सेवा को हरी झंडी दिखाई थी. 2022 में 500 भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली भारत गौरव पर्यटक ट्रेन को भी भारत और नेपाल के बीच हरी झंडी दिखाई गई थी । रामायण सर्किट के हिस्से के रूप में ये पहली ऐसी सेवा है ।
ऐसे समय में जब नेपाल, अपने सबसे बड़े ऋणदाता चीन के भारी आर्थिक प्रभाव में है । भारत का ये प्रयास सांस्कृतिक रूप से नेपाल को नजदीक लाने का भी अच्छा मौका है । भारत और नेपाल, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, ऐसे में Ayodhya Ram Mandir Corridor भारत नेपाल के संबंधो को बेहतर करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है ।